शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

सत्य साईं बाबा

24 अप्रैल, 2011 को प्रातः काल पुट्टपर्थी वाले श्री सत्य साईं बाबा का देहावसान
आज जो बहस छिड़ी हुई है कि साईं बाबा क्या थे तो मेरी नजर में आज वे इतिहास में शामिल हो गए हैं जिसे कोई मिटा नहीं सकता है , वे तो इंसान ही थे , हर वो इन्सान जो समाज के लिए कुछ करता है दुनिया में उसका नाम होता है , कहावत है , " मानो देव नहीं तो पत्थर " , भारत में सेकुलर का जो भूत सवार है यह उसका ही परिणाम है, जो कोई कुछ बोल देता है , जो भारत कि नैया डुबोने में लगे हैं , ये चैनल वाले भी बड़े जोर शोर से चिल्ला चिल्ला कर बोलते हैं जैसे सच का सारा ठेका ले रखा है /
सत्य साईं बाबा कौन थे ? हम पुराण कि बात न करें तो ......... २५०० सौ साल पहले जब भारत का इतिहास लिखा जा रहा था , " गौतम बुध ", " जैन भगवान् ",२६०० साल पहले , २००० साल पहले ," ईसा मसीह " , १४०० साल पहले " मुहम्मद साहब", ४०० साल पहले " गुरुनानक साहब " तथा इसी सदी मे "साईं बाबा " ये सब क्या थे " मनुष्य" और अब " सत्य साईं बाबा" इन सभी लोगों ने समाज के लिए अलग तरह के कार्य किये , सत्य साईं बाबा के पूर्ब के लोगों के समय में खून कि नदियाँ भी बहीं (लोगों ने इतिहास पड़ा होगा) , लेकिन हम सभी गाँधी जी को भूल जाते हैं , ये ही असली भगवान् कहलाने के लायक थे / जो दोनों साईं बाबा के बीच की कड़ी हैं, किसी भी इन्सान को भगवान का दर्जा इन्सान ही देता है , भगवान् नहीं .........मेरा विचार - "वे सभी महा पुरुष भगवान हैं जो लोगों के भाग्य को बदलते हैं"

धन्यवाद

राजेश  वर्मा