मंगलवार, 10 जुलाई 2012

हिग्स बोसोन व् भारतीय वेद-पुराण

कण कण में भगवान् यह कहावत सदियों से भारतीय जन मानस में गूँज रही है , आखिर यह कण कण में भगवान् या  ईश्वर शब्द भारत में कैसे उत्पन्न हुआ / वेदों  , पुराणों व भारतीय ग्रंथों में लिखीं  हजारों साल पहले जो भारतीय मनीषियों नें मनन ,मंथन व तप द्वारा ज्ञान प्राप्त किया व प्राकृत व ब्रह्माण्ड  से जुड़ा वैज्ञानिक निष्कर्षों का प्रतिपादन किया /  भारतीय ऋषि ,मुनियों ने  प्राचीन वैज्ञानिक आधार पर जांचा परखा व उसे लिपिबद्ध किया /
भारतीय संस्कृत के आधार से तो सभी जीवों व् कण कण में  ईश्वर व्याप्त है , जिसे हम सूक्ष्म कण कहते हैं , जो आँखों से दिखाई नहीं देता ,कानो से सुनाई नहीं देता , छूने का अहसास भी नहीं होता , पर वह होता है /
संसार में आज मनुष्य के द्वारा जो कुछ भी नया या पुराना आविष्कार किया गया है वह सब कुछ वेदों व पुराणों में लिपिबद्ध है , चाहें आयुर्वेद हो , ( सल्य क्रिया ) , गणित विज्ञानं , ब्रह्माण्ड की गुथियाँ या जीव विज्ञानं सभी विज्ञानं की आधार शिला भारतीय मनीषियों ने ही रखी/
उदाहरण : वायुयान की कल्पना भी संसार में रावण के पुष्पक विमान से हुई /
आज सूर्य व चन्द्र ग्रहण पड़ने की तरीख वैज्ञानिक मशीनों से गणना करके निकालते हैं और भारत में प्राचीन ग्रंथों में पहले ही लिखा था कब ब्रह्माण्ड में क्या घटना घटेगी / कौन सा गृह किसकी परिक्रमा करता है , दिन और रात की घटना कैसे घटती  हैं , सभी कुछ कहानी या ग्रंथों के रूप में सरल ,समझ व आत्मसात करने वाली है तभी तो चींटी से लेकर हांथी तक पूजे जाते हैं / जिसमे प्राकृत को बचाने का सन्देश दिया है /
हिग्स बोसोन कण तो दिखाई पड़ गया , इसका मतलब इसके  अन्दर भी उससे भी सूक्ष्म कण विधमान है क्यूंकि ईश्वर सूक्ष्म है और वह कभी दिखाई नहीं देता और न ही कभी दिखेगा /