पूरा समाज असुरक्षित महशूस कर रहा है हर तरफ अफरा-तफरी , भागम-भाग , लूट-घसोट , बईमानी, काला बाजारी , मिलावट , घूसखोरी, कमीशन खोरी , मंहगाई , बीमारी, बलात्कार, हत्या , प्रदूषण और क्या गिनू हर तरफ खाज कि तरह फैली हुई है। मै तो नहीं था पर शायद गुलामी के दिनों मे भी इतना खौफ नहीं हुआ होगा। उस वक्त लोग बेख़ौफ़ होकर गुलामी के लिए लड़ते थे , पर आज अपने ही लोगों पर गुलामों कि तरह बर्ताव किया जा रहा है। लोगों कि सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, आज जो लूट कि घटनाएँ हो रही हैं उसका कारण लोगों का आर्थिक रूप से कमजोर होना, आर्थिक असमानता, अमीरी गरीबी की खाई का निरंतर चौड़ा होना। आज देश का १८० लाख टन अनाज खुले में पड़ा सड़ रहा है और देश के कृषि मंत्री कहते हैं ऐसा तो होता रहता है। इतने अनाज से २० करोड़ लोग एक साल तक पेट भर सकते है , देश के पिछड़े क्षेत्रों में खाने को दाना नहीं है लोग घास की रोटी खा रहे हैं, कीड़े मकोड़े खा कर जी रहे हैं। यह कैसी आजादी है, कैसी सरकारें हैं जो किसी के जीवन का कोई मूल्य ही नहीं समझती। देश में जनसँख्या बढती ही जा रही है इसका मुख्य कारण शिक्षा की कमी, सरकारी प्रचार व प्रोत्साहन की कमी, जनता को जागरूक करना सरकार व समाज का उतर दायित्व है लेकिन सब सो रहे हैं एक अंतहीन दिशा की ओर बड़े चले जा रहे हैं। आज समय आ गया है लोग चेत जाएँ वर्ना उनकी पीड़ियाँ तबाह हो जाएँगी, बर्बर युग या कहिये बाबर युग फिर से आ गया है ...
धन्यबाद शनिवार, 17 जुलाई 2010
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